Gopal Gupta

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कृष्ण सुदामा

द्वारिका नगरी के द्वारे पर, पुछत हरि को धाम सुदामा,,
पांव मे जूती न सर पे पगड़ी, पुछत नाम बताओ सुदामा,,
द्वारपाल से बोले विनय कर, बंधू ये संदेशा  पहुंचा दो,,
द्वार पे प्रतीक्षा मे खड़ा है, मिलने को आयो है मित्र सुदामा,,


सैनिक के सुन वचन कन्हाई, नगे ही पांव दौड़ पड़े हैं,,
मित्र से मिलते हैं हो के समा सम, जेसो कन्हाई है वैसो सुदामा,,
प्रीत की रीत निभाते हरि है, जग को सीख सिखाते हरि है,,

भर के कोरिया   कंठ लगायो,  मित्र से मिलने कु मित्र है आयो,,
आशुन से है चरण पखारे,  नेह का लेप लगाए रहे हैं,,
राजा औ रंक का भेद मिटा कर,मित्रता नव पाठ पढ़ा कर,,
इस्थापित आदर्श किया है, मानव  धर्म सिखाए रहें हैं,,

Gopal Gupta" Gopal "

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3 Comments

madhura

07-Jun-2023 12:35 PM

good

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Sachin dev

14-May-2023 08:36 PM

Well done

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बहुत खूब

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